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  • बंदी ने की डाई पीकर आत्महत्या करने की कोशिश

    12/12/2014
    संवाद्दाता --फिरोज आलम
    उत्तर प्रदेश/ कानपुर देहात | कानपुर देहात के जिला न्यायालय में आज उस समय हड़कम्प मच गया। जब पेशी में आये एक बंदी ने डाई पीकर आत्महत्या करने की कोशिश की। आनन-फानन में बंदियों की अभिरक्षा में लगे पुलिस के जवान गंभीर अवस्था में कैदी को जिला अस्पताल ले गये। जहां डाक्टरों ने उसका उपचार शुरू कर दिया। उसकी हालत अभी भी नाजुक बनी हुई हैं। वहीं बंदी ने डाई पीने का कारण पुलिस की प्रताड़ना और सिकन्दरा एसओ की धमकियों को बताया हैं। वहीं पुलिस आलाधिकारी इस मामले में कुछ भी बोलने से कतरा रहे हैं।
    अस्पताल में लगा ये पुलिस का जमावड़ा, बेड में लेटा ये सक्स, पुलिस प्रताड़ता को बयां करता ये सक्स ये नजारा हैं जनपद कानपुर देहात के जिला अस्पताल का। जहां एक कैदी को पेशी के दौरान डाई पी लेने के बाद गंभीरावस्था में उपचार के लिए भर्ती कराया गया। दरअसल जनपद कानपुर के थाना चैबेपुर के गबडाहा गांव के ऋषि कटियार को वर्ष 2013 के दिसम्बर माह में कानपुर नगर की पुलिस ने पुलिस मुठभेड़ के दौरान चैबेपुर से पकड़ा था। पुलिस ने उसके खिलाफ गैंगेस्टर, आर्म एक्ट, एनडीपीसी एक्ट के तहत कार्यवाही की थी। वहीं पुलिस ने एक लूट की घटना में सामिल होना भी पाया था। लेकिन ऋषि कटियार ने इस आरोपो को पुलिस द्वारा झूठे मुकदमें में फसायें जाने की बात कहते हुए न्याय की गुहार लगाई। आज इन्ही मुकमदो में से एक गैंगेस्टर में ऋषि को पेशी के लिए कानपुर देहात के जिला न्यायालय में लाया गया। इसी दौरान उसने डाई पी ली जिससे उसकी हालत नाजुक हो गई। गंभीरावस्था में बंदियों की अभिरक्षा में लगे पुलिस के जवान उसकों जिला अस्पताल ले गये जहां डाक्टरों ने उसका उपचार सुरू कर दिया हैं। ऋषि की माने तो सिवराजपुर के तत्कालीन एसओ और वर्तमान में जनपद के सिकन्दरा थाने के एसओं जयप्रकाश यादव और तत्कालीन चैबेपुर एसओं अपने गुडवर्क के चलते उसे फर्जी मुकदमें में फसायां। इसके बाद उससे न्याय की गुहार लगाई। जिसके बाद से पुलिस उसको प्रताडित कर रही हैं। कोई उसकी फरियाद नहीं सुन रहा हैं। इसी के चलते उसने डाई पीकर आत्महत्या करने की कोशिश की। वहीं इस पूरे मामले में पुलिस के आलाधिकारी कुछ भी बोलने से कतरा रहे हैं।
    वहीं ऋषि की माने तो उसने अदालत के बने बंदियों की जेल में पेशी के बाद आने के बाद एक व्यक्ति से उसने खाने के सामान के साथ डाई मगवाई थी। जिसको उसने पिया। वहीं उस दौरान बंदियों की अभिरक्षा में लगे पुलिस के जवान वहां मौजूद थे। इससे पुलिस की कार्यशैली पर अनेको सवालियां निशान खड़े हो रहे हैं। क्या ऐसे ही पुलिस अपनी कार्यशैली को अंजाम देती हैं कब अभिरक्षा में खड़े सिपाही अपनी जिम्मेदारी समझेगे।


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