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पीएम मोदी बोले, नहीं होगा रेलवे का निजीकरण

  • 25/12/2014
    वाराणसी। एकदिवसीय दौरे पर अपने संसदीय क्षेत्र पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अस्सी घाट पर सफाई अभियान का जायजा लिया और नौ विशिष्ट व्यक्तियों और संस्थाओं को नॉमिनेट किया। इसके बाद उन्होंने जगन्नाथ मंदिर के पास गलियों में जाकर झाड़ू लगाई। यहां पर उन्होंने रेलवे विस्तारीकरण परियोजना का शुभारंभ किया। डीएलडब्ल्यू स्टेडियम में मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि पहले हम रेल को आगे बढ़ाएंगे, इससे देश भी आगे बढ़ेगा। उन्होंने साफ किया कि रेलवे का निजीकरण किसी सूरत से नहीं किया जाएगा। उन्होंने निजीकरण की बात करने वाले लोगों को भी करारा जवाब दिया। पीएम ने कहा कि रेलवे हमारे लिए केवल यात्रा का साधन नहीं है। रेलवे देश के विकास की रीढ़ है।
    रेलवे का जिक्र करते हुए उनका कहना था कि इससे मुझसे अधिक लगाव और कोई नहीं कर सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार रेलवे के विकास के लिए वचनबद्ध है और इसके लिए पैसे की कमी आड़े नहीं आएगी। मोदी ने साफ किया कि गरीबों के पैसे से रेलवे का विकास नहीं किया जा सकता है लिहाजा इसके विकास में अमीरों का पैसा लगाया जाएगा। इस मौके पर उन्होंने कहा कि कभी कभी विदेशों से आने वाले अन्न से हमारा पेट भरता था आज हमारे में इतनी ताकत है कि हम अन्न दूसरे देशों को भेजते हैं। पीएम ने कहा कि कभी लाल बहादुर शाश्त्री ने युवाओं को ललकारा था आज हम युवाओं को ललकारते हैं ।
    इससे पहले गुरुवार को सुबह करीब 11 बजे पीएम मोदी बाबतपुर एयरपोर्ट पहुंचे, जहां मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने उनका स्वागत किया। यहां से वे हेलीकॉप्टर से लंका चौक पहुंचकर बीएचयू के संस्थापक व भारत रत्न पंडित मदन मोहन मालवीय की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए।
    यहां से पीएम मोदी अस्सी घाट पहुंचे और सफाई का जायजा लेने के बाद वहां मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए सफाई अभियान में जुटे सभी स्वयंसेवी संगठनों, नगर निगम के कर्मचारियों, सामान्य प्रशासन और आम लोगों का आभार जताया।
    उन्होंने अभियान से जुड़ने के लिए नौ लोगों को नॉमिनेट किया। इसमें किरण बेदी, हास्य कलाकार कपिल शर्मा, पूर्व क्रिकेट खिलाड़ी सौरभ गांगुली, टीवी टुडे ग्रुप के अरुण पुरी, इनाडु ग्रुप के रामोजी राव, इंडियन चार्टर्ड अकाउंटेंट इंस्टीच्यूट, मुंबई के डिब्बावाले, नृत्यांगना सोनल मान सिंह और नगालैंड के राज्यपाल पद्मनाभ आचार्य शामिल हैं।
    इसके बाद पीएम मोदी सफाई अभियान में हिस्सा लेकर बीएचयू पहुंचे। यहां उन्होंने एक संबोधन में महामना मालवीय सहित तमाम महापुरुषों को याद करते हुए कहा कि 21वीं सदी भारत की जिम्मेदारियों की सदी है। उन्होंने 'अच्छी शिक्षा और अच्छे शिक्षक' पर बल देते हुए कहा कि हमारी शिक्षा रोबोट पैदा करने के लिए नहीं हैं। हमें यह गौर करना होगा कि हमारी शिक्षा की संस्कृति आज कहीं लुप्त तो नहीं हो रही है?
    उन्होंने कहा कि दुनिया में उत्तम शिक्षकों की कमी है। अरबपतियों को भी अच्छे शिक्षक की जरूरत होती है। अच्छी शिक्षा अच्छे शिक्षकों से जुड़ी है। हमें उत्तम शिक्षक तैयार करने होंगे। हमारे पास बहुत युवाधन हैं। हम ट्रेनिंग देकर दुनियाभर में शिक्षक एक्सपोर्ट कर सकते हैं। पीएम मोदी ने कहा कि व्यापारी विदेश से सिर्फ डॉलर लाता है लेकिन शिक्षक पूरी की पूरी पीढी को लाता है। मां और शिक्षक के योगदान की बातें सभी लोग करते हैं।
    पीएम मोदी ने कहा कि पूरी दुनिया भारत का हैंडीक्राफ्ट देख रही है। इसे बढ़ावा देने से गरीबों को मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि योग दिवस का प्रस्ताव 100 दिन में पूरा हो गया। हम कला साहित्य के माध्यम से नवजागण कर सकते हैं। हमारा संगीत मन को डुलाता है, बनारस की विरासत पर कोई स्कूल हो, तुलसी व कबीर पर स्कूल हो। उन्होंने कहा कि काशी में टूरिस्ट हमारे प्रयासों से ही रुकेगा। सफाई न होने के चलते लोग बीमार पड़ते हैं। बीमारी में खर्च होने वाले पैसे को बचाकर लोग पर्यटन पर खर्च करेंगे तो काशी को इससे लाभ मिलेगा। मोदी ने कहा कि बेटी को गर्भ में मारने से बड़ा पाप कोई नहीं।
    कोहरे को चीरेगा 'शीशा', गोली भी बेअसर
    दोपहर 3:01 बजे प्रधानमंत्री ने एसी पैसेंजर रेल इंजन का लोकार्पण भी किया। यह इंजन 4500 अश्वशक्ति का है । पीएम ने जिस वातानुकूलित इंजन का लोकापर्ण किया, उसमें आगे की ओर लगा शीशा बेहद कमाल का है। खास यह भी है कि डीरेका को इसे मुहैया कराया है बनारस के ही कारोबारी ने। रेल की दुनिया में यह भारत में किसी ट्रेन के इंजन में लगने वाला पहला ऐसा शीशा होगा, जिसकी रफ्तार पर कोहरा भी ब्रेक नहीं लगा सकेगा। नक्सल जैसी समस्याओं से जूझ रहे देश में इस इंजन में लगा शीशा ट्रेन चालकों की जान भी बचाने में सक्षम है।
    इंजन में सामने की ओर जहां से चालक आगे की ओर देखता है, इस 'हीटेड विंडशील्ड ग्लास' को डीरेका रेल प्रशासन को मुहैया कराया गया है। कोहरे के कारण भारतीय रेल हमेशा निशाने पर रही है, लेकिन रेल की दुनिया में इस शीशे की खासियत एक क्रांतिकारी कदम है। इस शीशे में सात-सात एमएम के दो ग्लास को चिपकाकर बनाया गया है। शीशे के किनारे की पट्टी पर एल्यूमिनियम की शीट लगी है जिसे एक तार से जोड़ा गया है।
    कोहरा होने पर आम शीशे पर ओस जम जाती है जिससे चालक को कुछ दिखाई नहीं देता है। इस नए शीशे का काम यहीं से शुरू हो जाएगा। ऐसी स्थिति में चालक को सिर्फ एक स्विच दबाना होगा। स्विच ऑन होते ही उक्त शीशे का तापमान पैतालिस से पचास डिग्री सेल्शियस तक पहुंच जाएगा जिससे ओस अपने आप साफ हो जाएगी। डीरेका प्रशासन के अनुसार इस शीशे की सबसे बड़ी खूबी एक यह भी है कि यह .22 बैरल की गन से चली गोली को भी झेलने में सक्षम है जो ट्रेन चालक की सुरक्षा के लिहाज से सबसे महत्वपूर्ण है।

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