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राजनाथ ने फंसाया झारखंड में पेंच, J&K में बीजेपी तैयार करने लगी साझा कार्यक्रम

  • 24/12/2014
    नई दिल्ली | झारखंड और जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनावों में शानदार कामयाबी दर्ज करने वाली बीजेपी ने दोनों राज्यों में सरकार बनाने को लेकर रणनीति बनानी शुरू कर दी है। इसी मुद्दे पर बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई बीजेपी संसदीय बोर्ड की बैठक में झारखंड के अगले मुख्यमंत्री पद को लेकर कोई सहमति नहीं बन पाई। पार्टी का एक धड़ा रघुबर दास तो दूसरा सीपी सिंह के नाम पर जोर दे रहा है। वहीं, बोर्ड ने जम्मू-कश्मीर में सरकार बनाने का फैसला किया है। सूत्रों के मुताबिक पार्टी ने पीडीपी के साथ सरकार बनाने पर गंभीरता से विचार करते हुए सरकार के एजेंडे को भी तय करना शुरू कर दिया है। बताया जा रहा है कि पीडीपी के साथ सरकार बनाने की स्थिति में बीजेपी कश्मीरी पंडितों के मुद्दे को न्यूनतम साझा कार्यक्रम (कॉमन मिनिमम प्रोग्राम) में शामिल करेगी। बीजेपी ने साझा कार्यक्रम के आठ बिंदु भी तय कर लिए हैं।
    दिल्ली की सत्ता के गलियारों में इस बात की चर्चा चल रही है कि बीजेपी और पीडीपी के बीच डीलिंग हो रही है। बताया जा रहा है कि दोनों पार्टियों में कुछ बातों पर सहमति बन रही है। इसमें केंद्र में पीडीपी को प्रधानमंत्री कार्यालय में एक राज्यमंत्री का पद देने और राज्यसभा में बीजेपी को दो सीटें देने की बात सामने आ रही है।
    पीडीपी संग जाने की सोच रही बीजेपी
    सूत्रों के मुताबिक, संसदीय बोर्ड की बैठक में यह तय किया गया कि जम्मू-कश्मीर में बीजेपी सरकार बनाएगी। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी के नेताओं ने दावा किया कि जम्मू-कश्मीर में निर्दलीय और छोटे दलों के छह विधायक बीजेपी के साथ हैं। इस तरह बीजेपी को 31 विधायकों का समर्थन है। इसलिए पार्टी राज्य में सरकार बनाने की कोशिश करेगी। बताया जा रहा है कि बीजेपी पीडीपी के साथ 3-3 साल सरकार चलाने के फॉर्मूले पर गंभीरता से विचार कर रही है। पार्टी अध्यक्ष अमित शाह पहले ही यह साफ कर चुके हैं कि उनके सामने सभी विकल्प खुले हुए हैं।
    पीडीपी ने नहीं खोले पत्ते
    पीडीपी ने अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं। पीडीपी का कहना है कि वह किसी जल्दबाजी में नहीं है और फिलहाल इंतजार करेगी। हालांकि, पीडीपी के लिए मुश्किल यह है कि वह केंद्र से बेहतर रिश्तों के लिए बीजेपी का समर्थन ले या वोटरों द्वारा नकारे गए कांग्रेस का सहारा ले। पीडीपी के प्रवक्ता नईम अख्तर ने भी कहा, "विचारधारा को लेकर हमारा भाजपा के साथ मतभेद है, लेकिन स्थिर सरकार देने के लिए हम समर्थन देने पर विचार कर सकते हैं।" ऐसे में, माना जा रहा है कि दोनों पार्टियां एक-दूसरे के साथ आ सकती हैं। बता दें कि पीडीपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। बीजेपी ने भी दूसरा स्थान हासिल किया है। नेशनल कॉन्फ्रेंस तीसरे और कांग्रेस चौथे नंबर पर खिसक गई है।
    पीडीपी को समर्थन दे सकते हैं उमर
    नेशनल कॉन्फ्रेंस नेता उमर अब्दुल्ला ने कह दिया है कि वह जम्मू-कश्मीर में सरकार बनाने के लिए पीडीपी का समर्थन कर सकते हैं। उन्‍होंने कहा, "हम पीडीपी को समर्थन देने के लिए तैयार हैं, यदि मुफ्ती मोहम्मद सईद फोन रिसीव करें या मुझे कॉल करें। यदि लालू और नीतीश कुमार साथ आ सकते हैं तो हम क्यों नहीं? मैं मुफ्ती साब के घर नहीं जा रहा हूं, लेकिन वह 15 विधायकों वाली नेशनल कॉन्फ्रेंस को इग्नोर नहीं कर सकते।"
    कैसे बन सकती है सरकार
    सबसे आसान रास्ता है - पीडीपी और भाजपा की सरकार बनना। वे पहले से भी दुश्मन तो नहीं ही हैं। इस तरीके से जो सरकार बनेगी तो वह पूरे जम्मू-कश्मीर को रिप्रेजेंट भी कर सकेगी। सबसे ज्‍यादा स्‍थायी सरकार भी यही होगी। आर्थिक पैकेज और दूसरी सहूलियतों की खातिर पीडीपी को केंद्र के पाले में रहने की जरूरत होगी। इस लिहाज से भी पीडीपी के लिए भाजपा का साथ लेना फायदेमंद होगा।
    दूसरा तरीक़ा है- भाजपा और नेशनल कॉन्फ्रेंस को छोड़ अन्य दलों से मिलकर पीडीपी सरकार बनाए, जिसमें कांग्रेस शामिल होगी।
    तीसरा तरीका है- भाजपा नेशनल कॉन्फ्रेंस और अन्य विधायकों से मिलकर सरकार बनाए। नेशनल कॉन्फ्रेंस के लिए पीडीपी के बजाय भाजपा के साथ जाना ज्यादा आसान होगा। नेशनल कॉन्‍फ्रेंस पहले भी केंद्र में भाजपा का समर्थन कर चुकी है। अटल सरकार के ज़माने में।
    ताजा हाल ये है-
    पार्टी लीड जीत
    पिछली बार के मुकाबले (ज्यादा या कम) कुल सीट
    बीजेपी 0 25 +14 25
    कांग्रेस 0 12 -5 12
    पीडीपी 0 28 +7 28 नेशनल कॉन्‍फ्रेंस 0 15 -13 15
    अन्य 0 7 -3 7
    रघुबर दास के नाम पर नहीं बन पाई सहमति
    भाजपा की संसदीय दल की बैठक में रघुबर दास का नाम झारखंड के मुख्यमंत्री की रेस में सबसे आगे रहा। लेकिन भाजपा के वरिष्ठ नेता राजनाथ सिंह की ओर से सीपी सिंह के नाम की सिफारिश के चलते उनके नाम पर मुहर नहीं लग सकी। बैठक में संसदीय दल में दास के नाम पर अधिकतर लोग सहमत थे, लेकिन राजनाथ की ओर से सहमति नहीं मिलने पर नाम पर मुहर लगाने का फैसला विधायक दल की बैठक होने तक के लिए टाल दिया गया। भाजपा अध्यक्ष शाह की ओर से बैठक में दास के नाम की पेशकश की गई, लेकिन राजनाथ सिंह ने सीपी सिंह का नाम आगे कर दिया। अब जेपी नड्डा झारखंड में बृहस्पतिवार को विधायक दल की बैठक करेंगे। उनके साथ झारखंड के चुनाव प्रभारी जाएंगे। हालांकि, भाजपा के सूत्रों की मानें तो रघुवर दास ही झारखंड के मुख्यमंत्री होंगे। उनके नाम को राजनाथ को छोडकर सभी सदस्यों की मंजूरी मिली है। अर्जुन मुंडा की हार के चलते मुख्यमंत्री पद की दौड़ में उनका नाम दास से पीछे रखा गया। बाद में बीजेपी के महासचिव जेपी नड्डा ने मीडिया को जानकारी दी कि पार्टी ने झारखंड और जम्मू-कश्मीर के लिए दो-दो पर्यवेक्षक नियुक्त किए हैं। नड्डा के मुताबिक, दोनों राज्यों में विधायक दल के नेता का चुनाव कराएंगे।

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