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  • मोदी की चली, तो काशी भी जाएंगे ओबामा

    22/12/2014
    नई दिल्ली | मोदी सरकार और ओबामा प्रशासन के अधिकारियों के बीच वाराणसी दौरा का कार्यक्रम फिक्स करने पर बातचीत चल रही है। गौरतलब है कि अमेरिका के राष्ट्रपति ओबामा अगले महीने 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि होंगे।
    सूत्रों के अनुसार, मोदी के अधिकारी चाहते हैं कि ओबामा अपने भारत दौरे में वाराणसी जाने का कार्यक्म भी तय करे। ओबामा के पहले से तयशुदा कार्यक्रमों को देखते हुए इस बात की संभावना तलाशने में दोनों देश के शीर्ष अधिकारी जुट गए हैं। वाराणसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र है।
    गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) के अवसर पर ओबामा को मुख्य अतिथि बनाकर मोदी ने एक बड़ी राजनीतिक बाजी जीती थी। सरकार की इच्छा है कि ओबामा का कार्यक्रम सिर्फ दिल्ली बेस्ड न हो जाए और दोनों देशों के विदेश मंत्रालय के अधिकारियों की बातचीत से हटकर इस बार कुछ नया किया जाए।
    दोनों देश के अधिकारी इस कोशिश में लगे हैं कि ओबामा को वाराणसी का दौरा कराया जाए। ओबामा प्रेसिडेंट प्रणब मुखर्जी से भी मिलने वाले हैं । हालांकि, वाराणसी एयरपोर्ट ओबामा के एयरफोर्स वन के लिए काफी छोटा है।
    मोदी की इच्छा नई दिल्ली के अलावा विदेशी नेता अन्य जगहों का भी करें दौरा
    विदेशी नेताओं का नई दिल्ली बराबर आना-जाना रहता है। इसके अलावा वे ताज महल का दीदार करने के लिए आगरा जाते रहते हैं। इन दोनों जगहों के अलावा विदेशी नेता भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई और आईटी हब कहे जाने वाले बेंगलुरु और हैदराबाद आते-जाते रहते हैं। हालांकि, मोदी चाहते हैं कि विदेशी नेता नई दिल्ली के अलावा अन्य क्षेत्रों का भी दौरा करें। इसी को देखते हुए चीन के राष्ट्रपति झी जिनपिंग का स्वागत उन्होंने अहमदाबाद में किया था।
    सूत्रों के अनुसार, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत दौरे के दौरान मोदी की इच्छा थी कि वे तमिलनाडु में रूस के सहयोग से बनाई जा रही कुडुनकुलम न्यूक्लियर प्लांट का दौरा करें, लेकिन प्लांट में तकनीकी खराबी आ जाने के कारण पुतिन वहां नहीं जा सके थे।
    वाराणसी दौरा से पर्यटन को हो सकता है लाभ
    ओबामा के वाराणसी दौरा से मोदी एक तीर से दो निशाना साध सकते हैं। पहला वाराणसी उनका संसदीय क्षेत्र है और दूसरा यह भारतीय संस्कृति के पुरातन स्थलों में से एक है। ओबामा के वाराणसी आने पर यहां के पर्यटन को बहुत बड़े पैमाने पर लाभ होगा। वाराणसी धार्मिक, ऐतिहासिक जगह होने के साथ ही शिक्षा का महत्वपूर्ण (बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, बनारस काशी विद्यापीठ) गढ़ है। इसके बगल में स्थिति सारनाथ का बौद्ध धर्म के लिए अपना महत्व है। वहां सभी बौद्ध देशों का मठ स्थित है। हाल ही में भारत सरकार ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के संस्थापक मदन मोहन मालवीय और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को भारत रत्न देने का फैसला भी किया है।



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